उत्तर प्रदेश

लखनऊ में बदल गया ड्राइविंग लाइसेंस टेस्ट

Kavita2
14 Sept 2026 12:17 PM IST
लखनऊ में बदल गया ड्राइविंग लाइसेंस टेस्ट
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लखनऊ। राजधानी में स्थायी ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने वाले आवेदकों के लिए सोमवार से नई व्यवस्था लागू हो गई है। अब आवेदकों को वाहन चलाने का परीक्षण ट्रांसपोर्ट नगर या देवा रोड स्थित एआरटीओ कार्यालय के ट्रैक पर नहीं देना होगा। स्थायी ड्राइविंग लाइसेंस के लिए ड्राइविंग टेस्ट उदेतखेड़ा मौंदा स्थित ड्राइविंग ट्रेनिंग एवं टेस्टिंग सेंटर में लिया जाएगा। इस केंद्र पर सेंसर कैमरे और कंप्यूटर आधारित प्रणाली के माध्यम से आवेदक की ड्राइविंग क्षमता का आकलन किया जाएगा।

परिवहन विभाग ने स्थायी ड्राइविंग लाइसेंस के लिए वर्षों से चली आ रही मैनुअल टेस्ट व्यवस्था समाप्त कर दी है। अभी तक ट्रांसपोर्ट नगर और देवा रोड स्थित एआरटीओ कार्यालयों में अधिकारी की मौजूदगी में आवेदकों का ड्राइविंग टेस्ट लिया जाता था। अब टेस्ट की पूरी प्रक्रिया ऑटोमेटेड होगी और ट्रैक पर लगे सेंसर वाहन की गतिविधियों तथा चालक की गलतियों को रिकॉर्ड करेंगे।

स्थायी ड्राइविंग लाइसेंस के लिए आवेदन करने की शुरुआती प्रक्रिया पहले जैसी ही रहेगी। आवेदक को ऑनलाइन आवेदन करने और निर्धारित शुल्क जमा करने के बाद ड्राइविंग टेस्ट का स्लॉट बुक करना होगा। इसके बाद उसे दस्तावेजों की जांच बायोमीट्रिक फोटो और हस्ताक्षर की प्रक्रिया पूरी कराने के लिए ट्रांसपोर्ट नगर या देवा रोड स्थित एआरटीओ कार्यालय जाना होगा। यहां औपचारिकताएं पूरी होने के बाद उसे वाहन चलाने के परीक्षण के लिए उदेतखेड़ा मौंदा केंद्र भेजा जाएगा।

नई व्यवस्था में आवेदक को पहले से अधिक दूरी तय करनी पड़ेगी। मौंदा स्थित केंद्र ट्रांसपोर्ट नगर से नादरगंज औद्योगिक क्षेत्र के रास्ते करीब 12 किलोमीटर दूर है। कानपुर रोड और किसान पथ के रास्ते इसकी दूरी लगभग 20 किलोमीटर बताई गई है। देवा रोड स्थित एआरटीओ कार्यालय से आने वाले आवेदकों को इससे भी अधिक दूरी तय करनी पड़ सकती है। इसलिए आवेदकों को दस्तावेजों की प्रक्रिया और टेस्ट के निर्धारित समय को ध्यान में रखते हुए घर से निकलने की सलाह दी गई है।

मौंदा केंद्र का उद्घाटन परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने 30 जून को किया था। शुरुआत में इस केंद्र पर प्रतिदिन केवल 150 आवेदकों का टेस्ट लेने की व्यवस्था थी। राजधानी में स्थायी ड्राइविंग लाइसेंस के लिए आने वाले आवेदकों की संख्या अधिक होने के कारण इसकी क्षमता बढ़ाने की जरूरत महसूस की गई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार अब केंद्र पर प्रतिदिन लगभग 250 से 300 आवेदकों का परीक्षण करने की व्यवस्था की गई है।

नई प्रणाली में टेस्ट ट्रैक पर लगे सेंसर वाहन के निर्धारित रास्ते से हटने गलत दिशा में जाने लाइन को छूने वाहन बंद होने या अन्य गलतियों को तुरंत दर्ज कर सकेंगे। कैमरों के माध्यम से परीक्षा की रिकॉर्डिंग भी होगी। आवेदक के प्रदर्शन का परिणाम कंप्यूटर आधारित व्यवस्था से तैयार होगा। इससे टेस्ट के परिणाम में मानवीय हस्तक्षेप की गुंजाइश काफी कम होने का दावा किया जा रहा है।

परिवहन विभाग का मानना है कि ऑटोमेटेड टेस्टिंग से केवल योग्य आवेदकों को ही स्थायी ड्राइविंग लाइसेंस मिल सकेगा। पुरानी मैनुअल व्यवस्था में टेस्ट के दौरान ढील दिए जाने और मानकों का समान रूप से पालन नहीं होने की शिकायतें सामने आती थीं। नई व्यवस्था में प्रत्येक आवेदक को एक जैसे निर्धारित मानकों पर वाहन चलाकर अपनी योग्यता साबित करनी होगी।

दोपहिया वाहन के आवेदकों को निर्धारित समय में विशेष ट्रैक पूरा करना होगा। टेस्ट के दौरान संतुलन संकेतक का प्रयोग मोड़ पर वाहन का नियंत्रण और निर्धारित लाइन के भीतर वाहन चलाने की क्षमता देखी जाएगी। कार तथा अन्य चारपहिया वाहनों के परीक्षण में आगे और पीछे वाहन चलाने पार्किंग ढलान पर वाहन नियंत्रित करने और संकेतों का पालन करने जैसी क्षमताओं का परीक्षण किया जा सकता है। वास्तविक मानक संबंधित श्रेणी के लिए केंद्र की निर्धारित टेस्ट प्रक्रिया के अनुसार लागू होंगे।

यदि कोई आवेदक ट्रैक पर निर्धारित मानकों को पूरा नहीं कर पाता है तो सिस्टम उसकी गलतियों को रिकॉर्ड कर उसे असफल घोषित कर सकता है। ऐसे आवेदक को नियमों के अनुसार दोबारा स्लॉट लेकर परीक्षण देना होगा। कुछ मामलों में असफल आवेदकों को फिर से प्रशिक्षण लेने की सलाह या आवश्यकता भी हो सकती है। इसलिए आवेदकों को टेस्ट से पहले यातायात संकेतों वाहन नियंत्रण और ट्रैक पर चलने का पर्याप्त अभ्यास करने को कहा गया है।

ट्रांसपोर्ट नगर कार्यालय में वर्ष 2014 में करीब 20 लाख रुपये की लागत से तैयार किया गया पुराना टेस्ट ट्रैक पूरी तरह बंद नहीं किया जाएगा। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक इस ट्रैक का उपयोग अब ड्राइविंग लाइसेंस के नवीनीकरण से जुड़े आवश्यक परीक्षण के लिए किया जाएगा। स्थायी लाइसेंस के नए आवेदकों का वाहन परीक्षण मौंदा केंद्र में ही होगा।

मौंदा केंद्र पर हाईटेक सुविधाएं होने के बावजूद नई व्यवस्था की सबसे बड़ी चुनौती आवेदकों के लिए दूरी और समय प्रबंधन हो सकती है। उन्हें पहले दस्तावेज सत्यापन के लिए एआरटीओ कार्यालय और उसके बाद परीक्षण के लिए अलग केंद्र जाना होगा। आवेदकों की संख्या अधिक होने पर दोनों स्थानों की प्रक्रिया पूरी करने में अतिरिक्त समय लग सकता है।

परिवहन विभाग का दावा है कि कंप्यूटराइज्ड टेस्टिंग से ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया अधिक निष्पक्ष पारदर्शी और विश्वसनीय होगी। इससे सड़क पर वाहन चलाने के लिए आवश्यक कौशल नहीं रखने वाले लोगों को लाइसेंस मिलने की संभावना कम होगी। लंबे समय में यह व्यवस्था यातायात नियमों के पालन और सड़क दुर्घटनाओं को कम करने में भी मददगार साबित हो सकती है।

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